कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी उनकी,
जो अल्फ़ाज़ नहीं, जज़्बात लिखने से रोकते हैं।
By Ajay Gautam
कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी उनकी, जो अल्फ़ाज़ नहीं, जज़्बात लिखने से रोकते हैं। By Ajay Gautam 👍Happy Customer Reviews4.9★★★★★922 likes
कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी उनकी,
जो अल्फ़ाज़ नहीं, जज़्बात लिखने से रोकते हैं।
By Ajay Gautam