मेरी बुराई के अख़बार छाप रहे हो,
मेरे साथ रहकर, मेरे ही ख़िलाफ़ चाल चल रहे हो।
हम तो थूककर निकल आए उस महफ़िल से,
जहाँ बैठकर तुम आज भी चाट रहे हो!
By Ajay Gautam

मेरी बुराई के अख़बार छाप रहे हो, मेरे साथ रहकर, मेरे ही ख़िलाफ़ चाल चल रहे हो। हम तो थूककर निकल आए उस महफ़िल से, जहाँ बैठकर तुम आज भी…
मेरी बुराई के अख़बार छाप रहे हो,
मेरे साथ रहकर, मेरे ही ख़िलाफ़ चाल चल रहे हो।
हम तो थूककर निकल आए उस महफ़िल से,
जहाँ बैठकर तुम आज भी चाट रहे हो!
By Ajay Gautam
