हूँ कृतज्ञ, कि मुझ जैसे कृतघ्न को,
आपका प्यार मिला।
जीवन की कठिन राहों में,
एक सच्चा आधार मिला।
जब-जब मन संशय में डूबा,
जब साहस भी हार गया,
आपके विश्वास के दीपक से
मेरा अँधियारा पार गया।
मैं भूलों का पथिक रहा,
अहंकार में कई बार भटका,
स्वार्थ की धूल आँखों पर थी,
सत्य का पथ भी मुझसे अटका।
यदि मुझमें आज कुछ अच्छा है,
उसमें आपका ही अंश खिला,
हूँ कृतज्ञ, कि मुझ जैसे कृतघ्न को,
आपका अमूल्य प्यार मिला।
ईश्वर से बस यही प्रार्थना,
आपका यश सदा बढ़ता जाए,
आपकी छाया, आपका आशीष
हर शिष्य का जीवन महकाए।
By Ajay Gautam
