मैं सृजन हूँ स्वयं का, भाग्य का मोहताज नहीं
Mai Srijan Hu Swayam ka, Bhagya Ka Mohtaj Nahi
मैं सृजन हूँ स्वयं का, भाग्य का मोहताज नहीं,
हथेलियों की रेखाओं में कैद मेरा आज नहीं।
तो लिख लो इतिहास के पन्नों पर ये कथन कहीं,
मैं सृजन हूँ स्वयं का, भाग्य का मोहताज नहीं।
