मैं क्या सोचता हूँ, ये तो उसने कभी सोचा ही नहीं,
उसने मेरी आँखों को पढ़ना ही सीखा नहीं।
मेरी दुनिया उसी के इर्द-गिर्द सिमटी रही,
पर उसने मुझे अपनी दुनिया में रखा ही नहीं।
मैंने हर बार उसे अपनी नजरों से देखा,
उसने मेरी नजरों का मतलब समझा ही नहीं।
मैंने दिल की हर बात उससे कहनी चाही,
पर उसने कभी सुनने का इरादा किया ही नहीं।
मैं क्या सोचता हूँ, ये तो उसने कभी सोचा ही नहीं,
और यही दर्द है कि उसने मुझे समझा ही नहीं।
