एक रोज़ तो तुझे जाना ही था, पर जल्दी क्यों,
दिल अभी समझ भी न पाया था, ये हलचल क्या थी।
एक रोज़ तो तुझे जाना ही था, पर जल्दी सही,
पर ये भी तो बता जाता, मेरी गलती क्या थी।
एक रोज़ तो तुझे जाना ही था, पर जल्दी यूँ,
जैसे मौसम ही बदल जाए बिना आहट के।
एक रोज़ तो तुझे जाना ही था, पर जल्दी क्यों,
कुछ सवालों के जवाब तो छोड़ जाता।
एक रोज़ तो तुझे जाना ही था, पर जल्दी यूँ,
जैसे दिल से कोई रिश्ता ही न रहा हो कभी।
एक रोज़ तो तुझे जाना ही था, पर जल्दी मैं तुम,
दिल को समझाने का मौका भी न दिया तुमने।
एक रोज़ तो तुझे जाना ही था, पर जल्दी मैं तुम,
मेरे सवालों के जवाब बिना कहे चले गए तुम।
एक रोज़ तो तुझे जाना ही था, पर जल्दी मैं तुम,
मेरे अपने होकर भी इतने पराये हो गए तुम।
